अब बताओ भला,पास किचन में रखी गाजर हलवा तो खाई न जा रही
३००० कि.मी. दूर से उनका दिमाग कैसे खा सकता हूं
फेंकने की भी हद होती है
आज़ादी के आईने में छत्तीसगढ़ का सच चौपालों पर रोजा रखते, विकास के सपने सारे, कागजों पर जगमगाते, झूठे झूठे चाँद-तारे। आज़ादी के कितने बरसों ब...
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