अब बताओ भला,पास किचन में रखी गाजर हलवा तो खाई न जा रही
३००० कि.मी. दूर से उनका दिमाग कैसे खा सकता हूं
फेंकने की भी हद होती है
श्रावणमासमाहात्म्यस्तोत्रम् (खेमेश्वर पुरी कृत) नमस्तस्मै महेशाय भक्तानां वरदायिने। श्रावणस्य च मासानामधिपाय कपर्दिने॥ श्रावणो मङ्गलो मासः...
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