Tuesday, October 22, 2019

आज का संदेश

*"सृष्टि कितनी भी परिवर्तित हो जाए किन्तु फिर भी हम पूर्ण सुखी नहीं हो सकते...!*

                   *परंतु*
*दृष्टि थोड़ी सी परिवर्तित हो  जाए तो हम सुखी हो सकते हैं।*
*"जैसी दृष्टी-वैसी सृष्टि"*
   
🌹🌼 *सुप्रभात* 🌼🌹

No comments:

Post a Comment

सरस्वती वंदना

॥ भगवती सरस्वती वंदना ॥ श्वेत पदमासना माँ, ज्ञान की प्रकाश पुंज, वीणा कर सोहै शुभ, रागिनी रसाल है। हंस की सवारी साजे, मंद-मंद मुसक्याँहि, वा...