*"सृष्टि कितनी भी परिवर्तित हो जाए किन्तु फिर भी हम पूर्ण सुखी नहीं हो सकते...!*
*परंतु*
*दृष्टि थोड़ी सी परिवर्तित हो जाए तो हम सुखी हो सकते हैं।*
*"जैसी दृष्टी-वैसी सृष्टि"*
🌹🌼 *सुप्रभात* 🌼🌹
आज़ादी के आईने में छत्तीसगढ़ का सच चौपालों पर रोजा रखते, विकास के सपने सारे, कागजों पर जगमगाते, झूठे झूठे चाँद-तारे। आज़ादी के कितने बरसों ब...
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