*अजीब खेल है उस परमात्मा का*
*लिखता भी वही है*
*मिटाता भी वही है*
*भटकाता है राह तो*
*दिखाता भी वही है*
*उलझाता भी वही है*
*सुलझाता भी वही है*
*जिंदगी की मुश्किल घड़ी में*
*दिखता भी नहीं मगर*
*साथ देता भी वही हैं*
💞
*🙏 सुप्रभात🙏*
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