Monday, July 2, 2018

काश मैं बेटी होती

हंसती,खेलती घर में रहती
पापा के गोदी में झूलती
मां की खाता प्यारी डांट
रोज जोहते सब मेरा बाट
घर में भी दुर्गा कहलाती
जिस घर में जाती लक्ष्मी कहलाती
हमेशा दिल से रिश्ता निभाती
मीठी बातों से सबका मन जीत जाती
मायके में रह मस्ती करता सब संग
संस्कार मेरे ससुराल में करते सब पसंद
मेरे बिदाई में बाबूल सग, अम्मा जमीन पर लेटी होती
मेरी किस्मत होती साहब,
बेटा नहीं गर मैं बेटी होती...
😊🤝🏻😊🤝🏻😊
:- खेमेस्वर पुरी गोस्वामी
मुंगेली छत्तीसगढ़

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