मुख्य अतिथि बन, मंच चमकाते हैं।
क्षेत्र में न दिखें कभी, दिल्ली में विलासी बनें,
जनता की भीड़ देख, हाथ को हिलाते हैं।।
लव और जिहाद रुका, न ही धर्मांतरण,
गौ-रक्षा हेतु मौन, शब्द न उगाते हैं।
मेज़ थपथपाने वाले, कानून बनाने वाले,
कानून न बना के, बस शोर ही मचाते हैं।।
© खेमेश्वर पुरी गोस्वामी ®
मुंगेली, छत्तीसगढ़,8120032834
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