Saturday, September 1, 2018

कमरछठ तिहार

खम्हार के पतरी म, पसहर के भात।
मिंझर के चुरहि, भाजी के छै जात।।
भंइस के दही संग, पाबोन परसाद।
दाई पोता मार के, दिही आसिरबाद।।
महतारी मन लइका खातिर, करे हे उपास।
जुग जुग जिए मोर लइका, अइसे हे बिस्वास।।
महतारी मन के सदा, सजे रहय सिंगार।
जम्मो झन बर सुग्घर हो, कमरछठ के तिहार।।

         ©✍पं.खेमेश्वर पुरी गोस्वामी✍®
                    मुंगेली - छत्तीसगढ़
                      ७८२८६५७०५७

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