Sunday, January 27, 2019

ये किसका फसाना है

ये किसका तसव्वुर है ,
ये किसका फ़साना है ।

जो अश्क है आँखों में ,
तस्वीह का दाना है ।

जो उनपे गुजरती है ,
किसने उसे जाना है ।

अपनी ही मुसीबत है ,
अपना ही फसाना है ।

आँखों में नमी -सी है ,
चुप -चुप से वो बैठे है ।

नाजुक सी निगाहों में ,
नाजुक सा फसाना है ।

ये इश्क नही आसां ....,
इतना तो समझ लिजिये।

इक आग का दरिया है ,
और डूब के जाना है ।

या वो खफा है हमसे ,
या हम है खफा उनसे ।

कल उनका जमाना था,
आज अपना जमाना है ।

ये किसका तसव्वुर है ,
ये किसका फसाना है ।

No comments:

Post a Comment

आज़ादी के आईने में छत्तीसगढ़ का सच

आज़ादी के आईने में छत्तीसगढ़ का सच चौपालों पर रोजा रखते, विकास के सपने सारे, कागजों पर जगमगाते, झूठे झूठे चाँद-तारे। आज़ादी के कितने बरसों ब...