*"ना फिसलो इस उम्मीद में,*
*कि कोई तुम्हें उठा लेगा,*
*सोच कर मत डूबो दरिया में,*
*कि तुम्हें कोई बचा लेगा,*
*ये दुनिया तो एक अड्डा है*
*तमाशबीनों का दोस्तों,*
*अगर देखा तुम्हें मुसीबत में,*
*तो हर कोई यहां मज़ा लेगा।"*
॥ भगवती सरस्वती वंदना ॥ श्वेत पदमासना माँ, ज्ञान की प्रकाश पुंज, वीणा कर सोहै शुभ, रागिनी रसाल है। हंस की सवारी साजे, मंद-मंद मुसक्याँहि, वा...
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