*"ना फिसलो इस उम्मीद में,*
*कि कोई तुम्हें उठा लेगा,*
*सोच कर मत डूबो दरिया में,*
*कि तुम्हें कोई बचा लेगा,*
*ये दुनिया तो एक अड्डा है*
*तमाशबीनों का दोस्तों,*
*अगर देखा तुम्हें मुसीबत में,*
*तो हर कोई यहां मज़ा लेगा।"*
आज़ादी के आईने में छत्तीसगढ़ का सच चौपालों पर रोजा रखते, विकास के सपने सारे, कागजों पर जगमगाते, झूठे झूठे चाँद-तारे। आज़ादी के कितने बरसों ब...
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