Thursday, January 22, 2026

बसंत पंचमी 2026 काव्य - मुक्तक


🌸 सरस्वती वंदना एवं बसंत स्वागत 🌸

वीणा की झंकार से, गूँज उठा संसार,
ब्रह्मा की उस सृष्टि को, मिला दिव्य उपहार।
अज्ञान का तिमिर मिटे, ज्ञान ज्योति जल जाए,
शारदे माँ की कृपा से, सुधरे जीवन का सार।

सरसों की उन बालियों में, सोना सा मुस्काया है,
आमों की उस मौर ने, मादक राग सुनाया है।
पीले अम्बर, पीले केसर, पीली छटा चहुँ ओर,
ऋतुराज बसंत ने देखो, अपना कदम बढ़ाया है।

शिव-परिधि का योग बना, रवि किरणों की लाली है,
ज्ञान और विवेक की माँ, जगत की रखवाली है।
अबूझ मुहूर्त शुभ घड़ी, कर लो मंगल का श्रीगणेश,
सरस्वती की भक्ति से ही, आती खुशहाली है।

कलियों पर भँवरे मँडराए, कोयल कूक सुनाती है,
शुष्क पड़े उन हृदय-वनों में, नव-ऊर्जा भर जाती है।
बागीश्वरी माँ चरणों में, शीश झुकाए सारा जग,
बसंत की ये पंचमी, नव-बोध हमें कराती है।

बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं 💐 💐 

          © खेमेश्वर पुरी गोस्वामी ®
         मुंगेली - छत्तीसगढ़, भारतवर्ष 
              मो.- ८१२००३२८३४

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