*प्रातः नमन*
कुटिल, स्वार्थी एवं असभ्य व्यवहार वाले
व्यक्ति के पास चाहे कितनी ही विद्या और
सम्पत्ति क्यों न हों, किन्तु वह *उस दूध के*
*समान* गन्दा व प्रदूषित है, *जो गन्दे पात्र*
*में रखा होने से दूषित हो जाता है ..*!!
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॥ भगवती सरस्वती वंदना ॥ श्वेत पदमासना माँ, ज्ञान की प्रकाश पुंज, वीणा कर सोहै शुभ, रागिनी रसाल है। हंस की सवारी साजे, मंद-मंद मुसक्याँहि, वा...
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