Saturday, January 3, 2026

छेरछेरा मया कोठी

🌾 छेरछेरा: माई कोठी 🌾
पुन्नी के चंदा हासय, अगास मा छाय हे उँजियारी,
कोठी मा धान भरे हे, मगन हे किसान खेमेश्वर भारी।
नवा फसल के नवा खुसी, नवा उमंग के दिन आए,
छेरछेरा के पुन्नी हा, सब बर सुग्घर संदेश लाए।
छेरछेरा... छेरछेरा! अउ कोनो झन राहय घेरा-बेरा,
निकालव धान ला माई कोठी से, अउ झारव अपन मया के डेरा!

लइका मन के सोर सुंनौ, बाजत हे डंडा अउ डफली,
गली-गली मा गूँजत हे, ए मधुर धुन ह कतकी सुघरी।
कोनो बन गे हे जोकर, कोनो धरे हे झोला हाथ मा,
खुसी के परब मनावत हन, हम सब झन आज साथ मा।
अन्न के दान ह सबले बड़े, इही हमर छत्तीसगढ़ी पहिचान,
जेकर मन मा दया बसे, ओही ह सही मा इनसान।
बड़-छोट के भेद मिटावन, सब ला गले लगावन गा,
ए छेरछेरा के तिहार मा, दान के गंगा बहावन गा।
छेरछेरा... छेरछेरा! अउ कोनो झन राहय घेरा-बेरा,
निकालव धान ला माई कोठी से, अउ झारव अपन मया के डेरा!

© खेमेश्वर पुरी गोस्वामी ®
छत्तीसगढ़िया पत्रकार, छत्तीसगढ़ 
मो. - 8120032834

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