Friday, February 13, 2026

अमर बलिदान को नमन

॥ अमर बलिदान को नमन ॥

मातृ-सेवा हित जिये, राष्ट्र-प्रेम रंग रँगे,
प्राणों की समिधा देके, अमर वो हो गए।

वीरता की गाथा लिख, गगन को चूम लिया,
भारत के मान हेतु, चंदन से सो गए।।

पर्वत सा साहस था, सिंधु सा विशाल हृदय,
कर्तव्य की राह पर, पुष्प बन खो गए।

याद रखेगा जहाँ, उनकी शहादत को,
अमर तिरंगे बीच, ज्योति बन बो गए।।

          © खेमेश्वर पुरी गोस्वामी ®
    मुंगेली, छत्तीसगढ़ ८१२००३२८३४

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