खुली जो आँख तो न वो था न वो ज़माना था,
बस दहकती आग थी तन्हाई थी फ़साना था,
क्या हुआ जो चंद ही क़दमों पे थक के बैठ गए,
तुम्हें तो साथ मेरा अभी दूर तक निभाना था...!!
योग का प्रकाश तन-मन को जो करे स्वस्थ, योग वही वरदान है, सच्ची शांति और खुशी का, यही सही विधान है। बीमारी को दूर भगाए, नई शक्ति का संचार कर...
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