हे कान्हा... मेरे प्यारे सावरे... मेरे चितचोर,
नजरों का क्या कसूर जो दिल्लगी तुमसे हो गई...
तुम हो ही इतने प्यारे की मोहब्बत तुमसे हो गई..
अब दिल की मेरी हसरत जुबां पर आने लगी ,
तुमको देखा और जिंदगी मेरी मुस्कुराने लगी..!
कोई सुध ही नहीं, ऐसी हुईं तुमसे मेरी दीवानगी
हर सूरत में बस एक तेरी सूरत नज़र आने लगी..!!
Thursday, March 14, 2019
सूरत नजर आने लगी
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
छत्तीसगढ़ : 26 वर्षों का गौरवशाली सफर और विकसित छत्तीसगढ़ 2047 का नव-संकल्प
छत्तीसगढ़ : 26 वर्षों का गौरवशाली सफर और विकसित छत्तीसगढ़ 2047 का नव-संकल्प 1 नवंबर 2000 को ‘दक्षिण कोसल’ की पावन धरा ने एक स्वतंत्र राज्य क...
-
शिवजी की पंचवक्त्र पूजा हिन्दू सनातन धर्मका सबसे बड़ा पर्व उत्सव मतलब महाशिवरात्रि। इस महारात्रि के मध्य समय ( रात्रि के 12 बजे ) वो ही ये ...
-
गोस्वामी की शव की संस्कार पुत्र या शिष्य,कुल रीति से संस्कार करें। शुद्ध जल से स्नान,भभुति, पुष्प आदि से पुजा करें! चमकाध्याय व नमकाध्याय ...
-
पं. खे मेस्वर पुरी गोस्वामी जी की राजवंश की एक झलक विक्रमादित्य के बाद १६ पीढ़ी हमारे संप्रदाय के राजाओं ने राज किया था। समुद्र पाल पुरी ...
No comments:
Post a Comment