" बन जाऊँ तेरी प्यारी तुझे प्यार करते करते ,
जीवन बिताया सारा कान्हा यूँ ही इन्तज़ार करते ,
है दिल में मेरे केवल तुझसे ही मिलने की उमंगें ,
कभी आ भी जाओ प्रियतम यूँ ही राह चलते चलते "|
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श्रावण मास महात्म्य स्तोत्रम (खेमेश्वर पुरी कृत)
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