Saturday, September 7, 2019

कुछ लफ्ज

जख्मी हो गईं नींदे मेरी,
                 ख्वाबों पर ऐसा वार किया..
जिस्म तो सलामत रह गया,
                 मेरी रूह को तूने मार दिया..!!

       ©खेमेश्वर पुरी गोस्वामी®
            मुंगेली - छत्तीसगढ़
८१२००३२८३४-७८२८६५७०५७

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