जख्मी हो गईं नींदे मेरी,
ख्वाबों पर ऐसा वार किया..
जिस्म तो सलामत रह गया,
मेरी रूह को तूने मार दिया..!!
©खेमेश्वर पुरी गोस्वामी®
मुंगेली - छत्तीसगढ़
८१२००३२८३४-७८२८६५७०५७
🌸 सरस्वती वंदना एवं बसंत स्वागत 🌸 वीणा की झंकार से, गूँज उठा संसार, ब्रह्मा की उस सृष्टि को, मिला दिव्य उपहार। अज्ञान का तिमिर मिटे, ज्ञान...
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