*सनातन धर्म के ग्रंथों वेद से लेकर पुराण तक में "अहिंसा परमो धर्म:" का उद्घोष किया गया है |*
*जब संसार में ईसाई एवं मुस्लिम धर्म बना तब सबको अपने समान बनाने के लिए यह प्रथा बनायी क्योंकि जब कोई अंधा होता है तो सोचता है कि सभी अंधे हो जाये और यही कारण था कि पश्चिमी सभ्यता ने जब भारतीय सभ्यता पर अतिक्रमण करना शुरू किया तो सबसे पहले उसने हमारी संस्कृति और सभ्यता को दूषित करना शुरू किया | पश्चिमी सभ्यता में बलिदान या बलि प्रथा का मतलब होता है किसी का वध करना जबकि वैदिक साहित्य में आपको बलि का मतलब उपहार देना या कर देना मिलेगा |*
*संस्कृत में बलि शब्द का अर्थ सर्वथा मार देना ऐसा नहीं होता | उसका अर्थ दान के रूप में भी उल्लेखित किया गया है |*
*यथा:--*
*प्रजानामेव भूत्यर्थं स ताभ्यो बलिम् अग्रहीत् !*
*सहस्रगुणमुत्स्रष्टुम् आदत्ते हि रसं रविः !!*
*रघुवंश महाकाव्यम्*
*अर्थात्: प्रजा के क्षेम के लिये ही वह राजा दिलीप उन से कर लेता था, जैसे कि सहस्रगुणा बरसाने के लिये ही सूर्य जल लेता है |*
*मतलब साफ है कि बलि देना उपहार देने से आशय था लोगों के किसी को मार देने से नही |*
*वैदिक साहित्यों में पशुबलि या हिंसा निषेध का उल्लेख और अहिंसा को पुष्ठ करते अनेक वेदमंत्र प्राप्त होते हैं :---*
*अग्ने यं यज्ञमध्वरं विश्वत: परि भूरसि स इद देवेषु गच्छति*
*ऋग्वेद- १:१:४*
*अर्थात :- हे दैदीप्यमान प्रभु ! आप के द्वारा व्याप्त ‘हिंसा रहित’ यज्ञ सभी के लिए लाभप्रद दिव्य गुणों से युक्त है तथा विद्वान मनुष्यों द्वारा स्वीकार किया गया है |*
*ऋग्वेद संहिता के पहले ही मण्डल के प्रथम सुक्त के चौथे ही मंत्र में यह साफ साफ कह दिया गया है कि यज्ञ हिंसा रहित ही हों | ऋग्वेद में सर्वत्र यज्ञ को हिंसा रहित कहा गया है इसी तरह अन्य तीनों वेदों में भी अहिंसा वर्णित हैं | फिर यह कैसे माना जा सकता है कि वेदों में हिंसा या पशु वध की आज्ञा है ?*
*अघ्न्येयं सा वर्द्धतां महते सौभगाय*
*ऋग्वेद-१:१६४:२६*
*अर्थात: अघ्न्या गौ- हमारे लिये आरोग्य एवं सौभाग्य लाती हैं*
*इस प्रकार अनेकों उदाहरण हमारे धर्म ग्रंथों में देखने को मिलते हैं | आधुनिक काल में बलि प्रथा का कारण सिर्फ मनुष्य की ज्ञान शून्यता एवं अपने उदर भरण के साधन के अतिरिक्त और कुछ नहीं कहा जा सकता*
आपका अपना
"पं.खेमेश्वर पुरी गोस्वामी"
धार्मिक प्रवक्ता-ओज कवि
प्रदेश संगठन मंत्री एवं प्रवक्ता
अंतरराष्ट्रीय युवा हिंदू वाहिनी छत्तीसगढ़
८१२००३२८३४-/-७८२८६५७०५७
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