Saturday, June 6, 2020

करार करके मुझे जिसने बेकरार किया है गीत


करार करके मुझे जिसने बेकरार किया है
हाँ उसी का मैंने अब तक इन्तजार किया है
करार करके मुझे जिसने बेकरार किया है

पिलायी मुझको आँखों से मैं शराबी बन गया
दिखायी मुझको वो अदाएं मैं दीवाना बन गया
हजार इम्तहां ले जिसने इन्तख़ाब किया है
हाँ उसी का मैंने अब तक इन्तजार किया है
करार करके मुझे जिसने बेकरार किया है

न जाने कैसा मौहब्बत का ग़ुल खिलता रहा
तेरी बातों ही में मुझको सकूं मिलता रहा
बिठाकर सामने, ख़ुद को बेनकाब किया है
हाँ उसी का मैंने अब तक इन्तजार किया है
करार करके मुझे जिसने बेकरार किया है

गरम गरम तेरी सांसें मैं लबों को चूमता
नरम नरम तेरी बाहें मैं बदन को चूमता
बैचेन इतना मुझे जिसने सारी रात किया है
हाँ उसी का मैंने अब तक इन्तजार किया है
करार करके मुझे जिसने बेकरार किया है

मैं ढूंढता हूँ उसे अब भी वो नज़र नहीं आती
पता मैं किससे करूं उसका कोई ख़बर नहीं आती
बीमार करके मुझे जिसने लाइलाज किया है 
हाँ उसी का मैंने अब तक इन्तजार किया है
करार करके मुझे जिसने बेकरार किया है

             "पं.खेमेश्वर पुरी गोस्वामी"
            धार्मिक प्रवक्ता-ओज कवि
             डिंडोरी-मुंगेली-छत्तीसगढ़
       8120032834/7828657057

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