*॥ गणतंत्र-महिमा ॥*
पूर्ण हुआ स्वप्न वहीं, शौर्य की वो गाथा बनी,
सत्ता अब हाथ जन-गण के सुहाती है।
पंद्रह अगस्त मिली, मुक्ति गोरे शासन से,
छब्बीस की सुुुबह, स्व-तन्त्र को जगाती है॥
लाहौर के तट लगा, गूँजने स्वराज मंत्र,
नेहरू की टेक आज, लक्ष्य को दिलाती है।
दो साल और ग्यारह, मास अठारह दिन,
संविधान-शक्ति जग, शीश को झुकाती है॥
भगत-आजाद-बोस, लहू से लिखी है नींव,
वीर बलिदानियों की, याद अकुलाती है।
कर्तव्य की राह चली, झाँकियाँ अनेक सजी,
भारत की एकता ही, विश्व को लुभाती है॥
मिटे भेद-भाव सारे, समता का दीप जले,
न्याय की मशाल सदा, राह को दिखाती है।
सीमा पे जवान डटे, देश की सुरक्षा हेतु,
तिरंगे की आन हमें, जीना ये सिखाती है॥
*🇮🇳शुभ गणतंत्र दिवस🇮🇳*
© खेमेश्वर पुरी गोस्वामी ®
मुंगेली, छत्तीसगढ़,भारतवर्ष
No comments:
Post a Comment