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*धर्म चाहे जो भी हो*
*अच्छे*
*इंसान बनो...*
*हिसाब हमारे*
*कर्म का होगा*
*धर्म का नहीं. . .*
॥ भगवती सरस्वती वंदना ॥ श्वेत पदमासना माँ, ज्ञान की प्रकाश पुंज, वीणा कर सोहै शुभ, रागिनी रसाल है। हंस की सवारी साजे, मंद-मंद मुसक्याँहि, वा...
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