Wednesday, June 3, 2026

राहों का सफ़र (बाल कविता)

 राहों का सफ़र

मैं स्कूल पढ़ने जाऊंगी,
खुद को गढ़ने जाऊंगी।
टीचर पाठ पढ़ाएगा,
मुन्ना खेल खिलाएगा।

सज-धज कर मैं जाऊंगी,
नई बातें सब पाऊंगी।
बस्ते में होंगी किताबें,
सुनूँगी ढेर सारी बातें।

पेंसिल से लिखूंगी नाम,
काम करूँगी बड़े तमाम।
क, ख, ग, घ का ज्ञान पाऊं,
ऊँचे सपनों को मैं सजाऊं।

गणित में जोड़-घटाना होगा,
ज्ञान का नया खजाना होगा।
खेल के मैदान में दौड़ूंगी,
जीत की डोरी को मोड़ूंगी।

दोस्त मिलेंगे प्यारे-प्यारे,
चमकेंगे हम सब तारे।
अनुशासन का पाठ पढूँगी,
ऊपर की ओर मैं बढ़ूँगी।

मेहनत करके नाम कमाऊं,
अपनी राह खुद ही बनाऊं।
टीचर का आदर मैं पाऊं,
सफलता की सीढ़ी चढ़ जाऊं।



           © खेमेश्वर पुरी गोस्वामी ®
       मुंगेली छत्तीसगढ़,८१२००३२८३४

चलो खेलें खेल निराले (बाल कविता)


चलो खेलें खेल निराले (बाल कविता)

आओ बच्चों, पास में आओ,
खेल पुराने मजे से गाओ।
गली-मोहल्ले, धूल-मिट्टी में,
खुशियां ढूँढें पक्की-पक्की में।

गुल्ली-डंडा ज़ोर से मारें,
आसमान में जीत उतारें।
भंवरा घूमे गोल-मटोल,
बांटी खेले सब अनमोल।

छुपन-छुपाई में छिप जाना,
पीट्टो को फिर से जमाना।
लंगड़ी-टांग उछल कर दौड़ें,
मैदानों के बंधन तोड़ें।

रस्सा-कसी में दम लगाएं,
कुदम कुदाई खेल रचाएं।
पत्ते वाली नाव बनाएं,
बरखा में हम सैर कराएं।

कंचे खेलें, कोड़ा दौड़ें,
हाथों में हम हाथ जोड़ें।
स्क्रीन छोड़ कर बाहर आएं,
आंगन में हम धूम मचाएं।

 फोन-टैबलेट रख दो भैया,
खेलें सब मिल, छोड़ के मैया।
पसीना बहने में है शान,
खेल ही है बचपन की जान!

           © खेमेश्वर पुरी गोस्वामी ®
       मुंगेली छत्तीसगढ़,८१२००३२८३४

राहों का सफ़र (बाल कविता)

  राहों का सफ़र मैं स्कूल पढ़ने जाऊंगी, खुद को गढ़ने जाऊंगी। टीचर पाठ पढ़ाएगा, मुन्ना खेल खिलाएगा। सज-धज कर मैं जाऊंगी, नई बातें सब पाऊंगी। ...