Wednesday, June 3, 2026

चलो खेलें खेल निराले (बाल कविता)


चलो खेलें खेल निराले (बाल कविता)

आओ बच्चों, पास में आओ,
खेल पुराने मजे से गाओ।
गली-मोहल्ले, धूल-मिट्टी में,
खुशियां ढूँढें पक्की-पक्की में।

गुल्ली-डंडा ज़ोर से मारें,
आसमान में जीत उतारें।
भंवरा घूमे गोल-मटोल,
बांटी खेले सब अनमोल।

छुपन-छुपाई में छिप जाना,
पीट्टो को फिर से जमाना।
लंगड़ी-टांग उछल कर दौड़ें,
मैदानों के बंधन तोड़ें।

रस्सा-कसी में दम लगाएं,
कुदम कुदाई खेल रचाएं।
पत्ते वाली नाव बनाएं,
बरखा में हम सैर कराएं।

कंचे खेलें, कोड़ा दौड़ें,
हाथों में हम हाथ जोड़ें।
स्क्रीन छोड़ कर बाहर आएं,
आंगन में हम धूम मचाएं।

 फोन-टैबलेट रख दो भैया,
खेलें सब मिल, छोड़ के मैया।
पसीना बहने में है शान,
खेल ही है बचपन की जान!

           © खेमेश्वर पुरी गोस्वामी ®
       मुंगेली छत्तीसगढ़,८१२००३२८३४

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