Friday, May 29, 2026

चोला राष्ट्रभक्ति का ये, जो दिखावे में ओढ़े हैं,

चोला राष्ट्रभक्ति का ये, जो दिखावे में ओढ़े हैं

चोला राष्ट्रभक्ति का ये, जो दिखावे में ओढ़े हैं,
वतन से सारे मतलब तो, ये ही छोड़े हैं।
जुबां पर नाम भारत का, मगर दिल में सरोकार नहीं,
सियाही के सिवा इनके, वतन का कोई त्यौहार नहीं।

ये कागज़ पर खिंची रेखा, सरहद मान बैठे हैं,
तिरंगे को महज अपनी, सनद मान बैठे हैं।
मगर जब बात माटी की, मुसीबत सामने आई,
तो पीछे हट के अपनी, ढाल इन्होंने तोड़े हैं।
चोला राष्ट्रभक्ति का ये, जो दिखावे में ओढ़े हैं।

कोई तो कंकड़ों को भी, हीरा कहके पूजे है,
कोई माटी के मस्तक पर, लहू का टीका गूँथे है।
ये सत्ता की रसाकशी में, वतन को भूल बैठे हैं,
लकीरें खींचने वाले, खुद अपनी राहें मोड़े हैं।
चोला राष्ट्रभक्ति का ये, जो दिखावे में ओढ़े हैं।

जो खुद को मुल्क का रक्षक, बताने का ढोंग करते हैं,
वही असल में इस माटी के, जमीर को सौदा करते हैं।
मगर याद रहे ये इनको, इतिहास का ये पन्ना है,
वतन की फिक्र करने वाले, न कभी पीछे हटे हैं।
वतन के असल वारिस तो, ये दिखावे में नहीं,
खून-पसीने से अपनी, तक़दीर खुद ही गढ़े हैं।

© खेमेश्वर पुरी गोस्वामी ®
मुंगेली छत्तीसगढ़,8120032834

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