Monday, June 22, 2026

मैं बनूँगा शिवाजी, मैं बनूँगा राणा सा

मैं बनूँगा शिवाजी, मैं बनूँगा राणा सा,

मैं बनूँगा शिवाजी, मैं बनूँगा राणा सा,
चंद्र बोस और भगत, बनूँ मैं बाबा सा।
सीने में हो आग तिरंगे की शान की,
सुनता रहूँ सदा गाथाएँ हिंदुस्तान की।

झाँसी वाली रानी बनूँ, मैं लडूंगी रण में,
मातृभूमि की सेवा हो, हर एक मेरे कण में।
सरोजिनी की वाणी जैसी शक्ति मैं पाऊँगी,
भारत माँ के गौरव को दुनिया को बताऊँगी।

महाराणा की तलवार बनूँ, मैं वीर अडिग रहूँ,
देश की रक्षा के खातिर, हर मुश्किल को सहूँ।
अशफ़ाक और बिस्मिल जैसा, बलिदान मैं कर जाऊँ,
स्वतंत्रता के इस दीप को, सदा जलाती जाऊँ।

आजाद की आज़ादी का, मैं मान बढ़ाऊँगा,
कलाम जैसा ऊँचा सपना, सच कर दिखाऊँगा।
वीरों की इस मिट्टी का, मैं कर्ज चुकाऊँगा,
भारत के इस गौरव को, विश्व में फैलाऊँगा।

तात्या की रण-नीति,मन में आज बसाएँगे,
मंगल की ललकार से,सोया देश जगाएँगे।
सुभाष 'आजाद हिंद', गौरव गान करेंगे हम,
भारत की हर ज़मीन का, मान बढ़ाएंगे हम।

पन्ना का त्याग महान, सदा याद रखेंगे,
वीरांगना अवंतीबाई सा,साहस साथ रखेंगे।
लाला के प्राणों की, आहुति याद दिलाती है,
हर भारतीय दिल में, एक क्रांति जगाती है।

मातृभूमि के चरणों में, हम शीश झुकाएंगे,
वीर सपूतों के पद-चिन्हों पर, आगे बढ़ जाएंगे।


सर्वाधिकार सुरक्षित : खेमेश्वर पुरी गोस्वामी 
मुंगेली, छत्तीसगढ़,८१२००३२८३४

No comments:

Post a Comment

।। भारतवर्ष महात्म्य स्तोत्रम ।।

॥ भारतवर्ष महात्म्य स्तोत्रम् ॥ हिमालयोत्तमा यस्य शिरोदेशे विराजते। सागरो यत्पदाम्भोजौ प्रक्षालयति नित्यशः ॥ १ ॥ पुण्यभूमिः सुविस्तारा भारतं...