छोड़ दो किताब सारी, देख लो पिता का मुख,
चेहरे की झुर्री बीच, ज्ञान का जहान है।
धूप और छाँव सह, पालते रहे जो हमें,
त्याग और रूप उनका, देव के समान है।
रिश्तों का विधान सिखा, जीवन सँवार दिया,
शीश जो झुकेगा यहाँ, बढ़ता महन है।
पूँजी है आशीष उनकी, राह जो दिखाते सदा,
तात के चरन बीच, झुकता गगन है।
© खेमेश्वर पुरी गोस्वामी ®
मुंगेली छत्तीसगढ़ ८१२००३२८३४
No comments:
Post a Comment