Friday, July 10, 2026

व्यवस्था और आम आदमी

व्यवस्था और आम आदमी

दफ्तर की धूल भरी फाइलें तो मौन खड़ी,
काम के बहाने हमें रोज दौड़ाते हैं।

टेबल के नीचे और बाबू की निगाहों में,
उम्मीदों के दीप यहाँ रोज बुझ जाते हैं॥

सफेद लिबास में हैं बैठे जो हुक्मरान,
आम आदमी की वे तो पीड़ा न बताते हैं।

फाइल के कागज़ों में दम तोड़ती है आस,
सिस्टम के चक्र में हम पिसते ही जाते हैं॥

सर्वाधिकार सुरक्षित 
खेमेश्वर पुरी गोस्वामी 
मुंगेली, छत्तीसगढ़ ८१२००३२८३४

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