Friday, July 31, 2026

कागज़ की ही पटरियों पर यह रेल दौड़ती रही

कागज़ की ही पटरियों पर यह रेल दौड़ती रही

कागज़ की ही पटरियों पर यह रेल दौड़ती रही,
पुरानी उस बात को नए लिफाफे में मोड़ती रही।
सात सालों में काम का कोई अता-पता न था,
राजनीति मगर क्रेडिट के तार जोड़ती रही॥
​
​फीता वही, कैंची वही, बस नए मंच सजा दिए,
शहर-शहर में ढोल के बाजे फिर से बजा दिए।
जनता समझ रही है इस सियासत की चाल को,
झूठे-सच्चे वादों के जलवे फिर से दिखा दिए॥
​
​जिस बात का कलश सात साल पहले चढ़ाया गया,
उसी पुरानी बात पर फिर से फूल बरसाया गया।
ज़मीन पर एक ईंट भी आज तक न लग सकी,
मगर मंच से अपनी पीठ को फिर थपथपाया गया॥

              सर्वाधिकार सुरक्षित 
          ©खेमेश्वर पुरी गोस्वामी®
     मुंगेली, छत्तीसगढ़,८१२००३२८३४

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